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शनि मंदिर
नगर से थोड़ी दूर सांवेर रोड पर प्राचीन शनि मंदिर भी यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां शनि देव के साथ-साथ अन्य नवग्रह भी विराजमान हैं इसलिए इसे नवग्रह मंदिर भी कहा जाता है। यहां दूर-दूर से शनि भक्त तथा शनि प्रकोप से प्रभावित लोग दर्शन करने आते हैं और शनि देव की स्तुति करते हैं। यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। यहां से शिप्रा नदी का नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। प्रत्येक शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। शनिश्चरी अमावस्या पर तो यहां दर्शनार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जिसके कारण प्रशासन को यहां अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती है। हजारों श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर शनि देव के दर्शन करते हैं तथा तेल व काले तिल चढ़ाते हैं जिससे की शनि प्रकोप कम हो। श्रद्धालु यहां अपने पुराने कपड़े तथा जूत-चप्पल छोड़ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उनका बुरा समय वही छूट जाता है।